साक्षी ध्यान क्या है? एक पेड़ से साक्षी में रहना सीखो। यही मार्ग है..

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साक्षी ध्यान

इस वृक्ष को देखो, इस वृक्ष की अपनी एक साधना है, उपासना है, तपश्चर्या है । जीवन का अपना एक अनुभव है। सदियों से इस प्रांगण में एक जगह खड़ा है… हर अच्छे बुरे वक्त को इसने देखा है, न इतराज न ही इतराया है | इसने वास्तव में साक्षी ध्यान को जिया है |

जिस हाल में इसे रखा गया है, उसे ईश्वर रजा मान कर प्रसन्नता से अपने सिर माथे लगाया है | पल हर क्षण का साक्षी बना है.. इसने साक्षी रहने की साधना करी है…

इसने उत्सव देखे हैं, नृत्य देखे हैं.. रुदन भी देखे है.. धूप देखी है, छाँव देखी है.. उतार-चढ़ाव सहे, न जाने कितनी बार पतझड़ आई और चली गयी बसंत आई और चली गयी, सबका स्वागत किया और सब से विदाई भी ली,  हर पल बस डटा रहा और वक्त की मार भी सही है। कई बार टूटा भी है और तोड़ा भी गया है पर सतत समय का समर्थन किया है |

स्तुतियां भी सुनी, आराधनाए भी देखी, ब्रह्म की सुगंध भी पाई है..  खुद से ऊपर उठ कर हर पल को प्रसन्नता से औरों के लिए जिया है। जीवन जिया ही नहीं अपितु जीवन दान भी कर रहा है, कभी श्वास के रूप में तो कभी छाया के रूप में… सदैव सबका मंगल ही चाहा है और मंगल ही किया है।

खुद से ऊपर उठ कर जीना खुदा के लिए जीना बन जाता है 

खुले आकाश का आलिंगन किया है। ईश्वर की रज़ा को अपनी रजा बनाया है।
हर पल मौन के गीत गाये हैं। सिर्फ ऊपर ही नहीं उठा, बल्कि भीतर भी गहरा उतरा है। स्थिरता व दृढ़ता की सतत साधना कर रहा है।
स्वयं के होने को उसका होना बनाया है। खुद होकर भी खुद नहीं… खुद से खुदा की झलक झलकाई है। कई पीढ़ियों का दर्शन किया है। न किसी के होने से आपत्ति है न किसी के होने का हर्ष… हर्ष व शोक से ऊपर साक्षी में जीता है। साक्षी में रहता है। यही मार्ग है.. ॐ आनंद… ॐ शांति… ॐ अनंत…

-नित्यानंदम श्री

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2 COMMENTS

  1. Is paudhe ke udahaaran se mujhe mere jivan mein ek naya lakshya mil gaya ab mujhe es paudhe ki tarah har cheejo samana krne ki sankalp utpan ho gyi
    Dhanyavaad apke bhitar paramaatma ko hum logo ko bodh krnne ke liye
    Yeh video mai ne dekhi thi depression cure series jab mujhe depression kafi madad mili thi

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