लययोग क्या है? इसकी साधना कैसे करें? जानिये

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लययोग

दैनिक क्रियाओ को करते हुए ईश्वर का नाम स्मरण करना लययोग है । तुकाराम जी महाराज कहते है:

“नाम जप से बढकर कोई भी साधना नहीं है । तुम जो चाहे सो करो, नाम लेते रहो लययोग करते रहो । इसमें भूल न हो । अन्य किसी साधन की जरुरत नही है । बस निष्ठा के साथ नाम जपते रहो”

संत ज्ञानेश्वर महाराज जी ने नाम की महिमा के विषय में कहा है:

भगवन्नाम का जप संकीर्तन संसार के सभी दु:खो से मुक्ति दिलाता है एवं सारा विश्व आनंद से ओत-प्रोत हो जाता है ।

लययोग से चारो आश्रम ब्राहमण, क्षत्रिय, शुद्र, वैश्य सभी सिद्धि को पा लेते है और बड़े में बड़ी सिद्धि है ह्रदय की शुद्धि ।

लययोग शोर मचा कर ऊँची आवाज़ में नहीं करता है ।

सिमरण ऐसा कीजिये खरे निशाने चोट ।

मन ईश्वर में लीन हो हिले न जिव्हा होंट ।।

हम हररोज लगभग 21600 श्वास खर्च करते है । हमारी उम्र वर्षो पर नही श्वासों पर गिनी जाती है । लययोग से श्वासों पर नियंत्रण आता है ।

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