मंत्र जपने वाले साधक कितने प्रकार के होते हैं? कैसे जप करना है सबसे श्रेष्ठ जानिये

1
6424

जापक कैसा होना चाहिए ?                         

जापक चार प्रकार के होते है ।

१.कनिष्ठ   २.महयम  ३.उत्तम  ४.सर्वोत्तम

कुछ जापक कुछ पाने के लिए, सकाम भाव से जप करते है व कनिष्ठ कहलाते है ।

दूसरे जो गुरुमंत्र लेकर केवल नियम कि पूर्ति के लिए जप करते है । वे मध्यम कहलाते है ।

तीसरे जो नियम पूरा करते ही है, कभी दो चार माला ज्यादा ही कर लेते है । पर इनमें मंत्र जाप से कुछ सांसारिक चीजें पानें की भावना नहीं होती की मेरा कोई मनोरथ कोई मनोकामना पूरी हो जाए | ये उतम जापक है । कुछ ऐसे जापक होते है कि जिनके सानिध्य मात्र से सामने वाले का जप शुरू हो जाता है । ये सदैव अजपाजप की अवस्था में पहुँच चुके होते हैं | ऐसे जापक सर्वोतम है ।


 

जप करने कि पद्धति क्या है ?

जप करने कि चार पद्धतियां है:-

१.वैखरी  २.मध्यम  ३.पश्यति  ४.परा

शुरू-शुरू में उच्च स्वर से जो जप किया जाता है । उसे वैखरी मंत्र जप कहते है ।

मध्यम जप में होंठ भी नही हिलते कोई अन्य सुन भी नही सकता ।

जिस जप में जिव्हा भी न हिले पर चित भी तल्लीन हो जाये उसे पश्यति जप कहते है ।

चौथा मंत्र जप करते-करते आनंद आने लगे उसे परा मंत्र जप कहते है ।

 

याज्ञवल्क्य सहिता में आता है कि

परा में एक बार जप करे तो वैखरी कि दस माला के बराबर है । जैसे पानी को वाष्प बनाने से अर्थात सूक्ष्म बनाने से उसमे १३०० गुनी ताकत आ जाती है वैसे ही मंत्र को जितनी गहराई से जपा जाये उतना ही ज्यादा प्रभाव होता है ।

+18

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here