वृक्क निष्क्रियता (किडनी फेलियर) से सम्बंधित रोगों के लिए पानी ऐसे पियें | नित्यानंदम श्री

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किडनी

सभी किडनी के रोगों में पानी उबाल कर ही पियें | उबला पानी पचने में हल्का और किडनी को वह पानी बाहर निकालने में कोई समस्या नहीं आती | बिना उबाला पानी कई बार पचने में भारी होता है और किडनी द्वारा उसे बाहर निकालने में कठिनाई होती है और वह पानी अन्दर रुकता है तो शरीर में सूजन आ जाती है |

  1. पानी सुबह ही उबाल कर किसी कांच की बोतल में भर कर रख लें और वह पानी आप दिन भर पीने के लिए और सब्जी भाजी बनाने में प्रयोग करें | उबला पानी भी यदि रात्रि तक प्रयोग में न आये तो अगली सुबह वही पानी फिर से बासी हो जाता है और पचने में भारी भी हो जाता है | इसलिए उतना ही पानी उबालें जितना एक दिन में प्रयोग हो जाए | पानी गुनगुना पियें अथवा ताजा हो जाने पर पिए उसमे कोई दिक्कत नहीं है, सर्दी में गुनगुना / गर्म पानी पीने में आनंद आता है और गर्मी में ताजा |
  2. आप यदि समर्थ है तो सुबह के लिए अलग और शाम के लिए अलग-अलग पानी उबाल कर प्रयोग में लावें, इस से वह पानी अधिक पुराना नहीं होगा बल्कि ताजा ही प्रयोग में आ जाएगा |
  3. आप यदि समर्थ हैं तो किसी चांदी के गिलास में रखा हुआ उबला पानी भी प्रयोग कर सकते हैं | ताम्बे के बर्तन का पानी सभी किडनी रोगियों को रास नहीं आता | बल्कि उस मिटटी के बर्तन का भी पानी न पियें जिसे पूरी तरह पकाया न गया हो |
  4. पीने का पानी उबालने के लिए पीतल के कलई किये हुए बर्तन में पानी उबालें | इसके लिए एल्युमीनियम का बर्तन प्रयोग न करें | स्टील भी इतना गुणकारी नहीं है पर चारों तरफ कोई उपाय न हो तो फिर स्टील या लोहे के बर्तन का प्रयोग पानी उबालने के लिए करें | लेकिन नॉन स्टिक बर्तनों का प्रयोग न करें |
  5. सब्जी / रोटी आदि बनाने में या आटा गूंधने में भी उबला पानी ही प्रयोग करें |
  6. पानी को उबाल कर जब एक चौथाई रह जाए तो उसे बोतल में भर कर रख लें और सारा दिन प्रयोग करें | पानी उबलने पर यदि एक चौथाई शेष रह जाए तो वह पानी किडनी रोगी के लिए अति उत्तम माना जाता है | लेकिन यदि इताना उबालने का सामर्थ्य न हो तो भी पानी को उबाल कर आधा कर लें यह पानी पित्त नाशक माना जाता है |
  7. पानी हमेशा चूल्हे या गैस पर उबालें | माइक्रोवेव का प्रयोग न करें |

जिज्ञासा :- क्या उबालने के स्थान पर हम आर-ओ या फ़िल्टर का पानी प्रयोग कर सकते हैं ?

समाधान :- नहीं | क्योंकि पानी फ़िल्टर करनें से साफ़ होता है किन्तु उबालने से हल्का हो जाता है |

नोट : – उबला हुआ पानी प्रयोग करने से पेशाब में झाग नहीं आती और पानी शरीर में इकठ्ठा नही होता | पाचन क्रिया हल्की और चुस्त रहती है | कुछ स्थानों का पानी भारी होता है उबालने से वह पानी एक सामान हल्का हो जाता है |

प्रश्न :- रोजाना कितना पानी पियें ?

उत्तर : – बहुत से डॉक्टर्स का कहना है कि रोजाना एक से सवा लीटर पानी पियें क्योंकि अधिक पानी पीने से किसी किसी की किडनी पर अतिरिक्त भार पड़ता है | हमारा भी यही कहना है कि रोजाना इतना ही पानी (एक से सवा लीटर पानी पियें) पियें लेकिन यदि कभी प्यास ज्यादा लगे तो उबला हुआ पानी थोड़ा अधिक भी पिया जाए तो कोई समस्या नहीं है शर्त यही है कि आपको पेशाब खुल कर आता हो बस |

सावधानियां :- गर्मी हो या सर्दी ठंडा पानी पीने से बचें | बहुत मन करे तो गर्मी में उबला हुआ पानी ताजा हो जाने पर किसी साफ़ घड़े में डाल कर रख लें और उसे दिन भर प्रयोग करें लेकिन फ्रिज का ठंडा पानी अथवा बर्फ या बर्फ जैसी ठंडी चीजें पेट व किडनी की अग्नि कम कर देंगी और किडनी को चलने नहीं देंगी |

जरुरी निर्देश :- जब भी पानी पियें उस में एक चम्मच पुनर्नवा और गिलोय का अर्क डाल सकते हैं |

सूर्यास्त के बाद पानी कम बहुत कम पियें और यदि बहुत प्यास लगे तो ही देर रात में पानी पियें |

पानी हमेशा बैठ कर व घूँट घुट करके उसमें थूक व मु की लार मिलाकर पियें  | घूँट घूँट कर के पिया हुआ पानी हाज़मा करेगा तेज तेज पिया हुआ पानी भारीपन लाएगा |

भोजन के प्रारंभ में दो घूँट पानी अवश्य पियें यह अमृत का काम करेगा | भोजन के मध्य में आधा भोजन कर के फिर दो घूँट पानी पियें यह दवाई का काम करेगा | भोजन के तुरंत बाद पिया हुआ पानी विष (जहर) के समान है | यदि पेशाब पीला आता है तो भोजन के आधे घंटे बाद थोड़ा पानी जरुर पियें | खाने के एक घंटे बाद पानी अवश्य पियें | भोजन के साथ साथ पानी न पियें | गटागट पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त जोर पड़ता है |   – नित्यानंदम श्री

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B P Verma
B P Verma
2 months ago

swami ji jalodhraji ras nahi mil raha hai ho to kripaya batayen

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