खस की जड़ का शरबत पीकर शरीर की गर्मी और जलन से पायें निजात जानिए बनाने की विधि

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1890
खस

खस का शरबत

द्रव्य: खस मूल 1 भाग, जल 13 भाग और शर्करा (चीनी) 4 भाग लें, निम्बू फूल (निम्बू सत / साइट्रीक एसीड) आवश्यकतानुसार 3 ग्राम / प्रति किलो चीनी के हिसाब से सोडियम बेन्झोएट (प्रति 1½ लीटर शरबत में 1 ग्राम) ;

निर्माण विधान : 1. प्रथम खस को जल में उबालकर एक चौथाई शेष रहने पर छानकर फिर उस काढ़े में चीनी डालकर गरम करें | और मंदाग्नि पर चासनी बनायें | 2. चासनी बनते समय साइट्रीक एसीड थोड़ा डालने से चीनी का मैल निकल जाता है | 3. फिर चासनी ठंडी होने पर सोडियम बेन्झोएट को चासनी में डाल दें | एक तार की चासनी को ठंडा करके बोतल में भर लें | रंग व गंध आवश्यकतानुसार चाहें तो मिला सकते हैं उसके बिना भी प्रयोग में ला सकते हैं |

मात्रा : आवश्यकता अनुसार 15 से 20 मि. लि. शरबत एक गिलास शीतल जल में घोलकर पियें|

गुणधर्म : खस की अपनी एक सुगंध होती है जो मन को शांति प्रदान करती है | इसकी तासीर शीतल यानि ठंडी है और सीने, पैरों व शरीर की जलन को शांत करता है | बार-बार प्यास लगना और गला सूखना में आराम देता है | ज्वर (बुखार), अम्लपित (एसिडिटी), मूत्रदाह (पेशाब में जलन), रक्तविकार (खून की गर्मी), पित्त का बढ़ना, चक्कर आना, गर्मी लगना, उल्टी होना, पसीने में दुर्गंध आदि में उपयोगी है |

सावधानी : इसे कफ़ प्रकृति वाले न पियें | इसे कांच की बोतल में एक वर्ष के लिए स्टोर करके आराम से रखा जा सकता है | बिना प्रीजरवेटिव डाले भी इसे बना कर एक सप्ताह तक कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रख कर प्रयोग किया जा सकता है |

आनंदम आयुर्वेद

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