शास्त्र वर्णित मनुष्य शरीर में वीर्य की महिमा : मरणं बिन्दु पातेन जीवनम् बिन्दु धारणात्

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वीर्य

मरणं बिन्दु पातेन जीवनम् बिन्दु धारणात्

अर्थात : वीर्य की बूंद गिरने से मृत्यु और रक्षा करने से जीवन को उर्जा मिलती है |

वीर्य खून का सत्व है, वह किसी एक स्थान में न रहकर, सारे शरीर में जमा रहता है, जैसे गन्ने में रस वैसे नसों में वीर्य |

वीर्य शरीर की अंतिम धातु है | खाए हुए भोजन से रस, रक्त और अंत में वीर्य बनता है, 40 बूंद रक्त से एक बूँद वीर्य बनता है | पुरुष एक बार के भोग में जितना वीर्यपात करता है उसे बनाने के लिए शरीर का लगभग 560 ग्राम खून खर्च होता है |

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