सम्भोग (मैथुन) करने का सही समय, नियम और मर्यादा एक गृहस्थ के लिए महर्षि वाग्भट्ट ने बताई : अष्टांग हृदयं

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मैथुन

महर्षि वाग्भट्ट गृहस्थ दम्पत्तियों के सूकून भरे गृहस्थ जीवन व संतान उत्पत्ति में आने वाली रुकावटों को ध्यान में रखते हुए अपने ग्रन्थ अष्टांग हृदयं के अध्याय 07 के श्लोक क्रमांक 69 से 76 में उपदेश देते हैं कि

ग्राम्यधर्मे त्यजेन्नारीमनुत्तानां रजस्वलाम् |

अप्रियामप्रियाचारां दुष्ट संकीर्ण मेहनाम् ||६९||

अतिस्थूलकृशां सूतां गर्भिणीमन्ययोषितम् |

वर्णिनीमन्ययोनिं च गुरुदेवनृपालयम् ||७०||

भावार्थ : महर्षि वाग्भट्ट नें ऐसी स्त्री से सम्बन्ध स्थापित करने के सर्वथा मना किया है जो पेट के बल लेटी हुई हो उस स्तिथि में पति मैथुन (सम्भोग) न करे, रजस्वला यानी की स्त्री के मासिक धर्म के दिनों में, और जो दिखने में अप्रिय हो यानि जो सवर कर न रहे – हर समय मैली और अप्रिय बनी रहे या फिर अपना आचरण / व्यवहार दूसरों से ठीक न रखे, जिसकी योनि दूषित हो भाव कि गुप्तांगों में किसी प्रकार का रोग या संक्रमण हो गया हो (जब तक कि संक्रमण ठीक न हो जाए),  अतिस्थूल ( जिसके शरीर पे अत्यधिक चर्बी चढ़ी हो), अतिकृश (जिसका शरीर जरुरत से ज्यादा पतला, कमजोर और बेजान हो), प्रसूता (जिसने बालक को जन्म दिया हो और वो बालक को दूध पिलाती हो), गर्भिणी (जिसके पेट में गर्भस्थ शिशु हो),  ब्रह्मचारिणी (जिसने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया हो), पराई स्त्री और मनुष्य जाती से हट कर किसी जानवर के साथ मैथुन नहीं करना चाहिए |

नोट : ये हिदायत सिर्फ पुरुष के लिए नहीं है, यदि कोई पुरुष भी उपरोक्त बातों में हिसाब से अयोग्य है तो स्त्री को भी पुरुष से दूर रहना चाहिए | और ये भी ध्यान रहे की महर्षि ने पेट के बल लेटी स्त्री से भोग करने के लिए मना किया है लेकिन महर्षि चरक ने अपने ग्रन्थ में स्पष्ट कर दिया है कि स्त्री को गर्भ धारण (रतिक्रिया) के समय पीठ के बल लेटना चाहिए |

चैत्यश्मशानाऽऽयतनचत्वराम्बुचतुष्पथम् |

पर्वाण्यनङगं दिवसं शिरोहृदयताडनम् ||७१||

अत्याशितोऽधृतिः क्षुद्वान् दुःस्थिताङगः पिपासितः |

बालो वृद्धोऽन्यवेगार्तस्त्यजेद्रोगी च मैथुनम् ||७२||

भावार्थ : गुरु के घर जाकर, मंदिर या पूजा स्थल, राजा का घर, शमशान / कब्रिस्तान वाली जगह आदि पर,

बूचड़खाना (जहाँ जीव जंतुओं की ह्त्या होती हो), चौपाल, नदी तट, चौराहे पर और पर्वकाल जैसे संक्रांति, एकादशी, पूर्णिमा, अमावास्या, सूर्य ग्रहण तथा चन्द्र ग्रहण में मैथुन की मनाही है | योनि के इलावा मुख (मुंह), मल द्वार आदि में और दिन के समय मैथुन कर्म नहीं करना चाहिए | मैथुन कर्म के समय छाती (हृदय के पास) या सर में प्रहार नहीं करना चाहिए | अधिक भोजन करके, जब घबराहट हो रही हो, बहुत जोरों से भूख लगी हो या व्रत के कारण कुछ खाया न हो, बहुत ज्यादा प्यास लगी होने पर और मल मूत्र का वेग लगा हो तब भी मैथुन कर्म नहीं करना चाहिए | इसी तरह बालक, रोगी और वृद्ध को भी सम्भोग की मनाही है |

सेवेत कामतः कामं तृप्तो वाजीकृतां हिमे |

त्र्यहाद्वसन्तशरदोः पक्षाद्वर्षानिदाघयोः ||७३||

भ्रम क्ल मोरू दौर्बल्य बलधात्विन्द्रियक्षयाः |

अपर्वमरणं च स्यादन्यथा गच्छतः स्त्रीयम्  ||७४||

भावार्थ : वाजीकरण द्रव्य जिस से पुरुष की काम शक्ति बढ़े ऐसे आहार से जो पुरुष तृप्त हो उसे हेमंत एवं शिशिर ऋतु में इच्छा अनुसार मैथुन कर्म करना चाहिए |

वसंत एवं शरद ऋतु में तीन तीन दिन के अंतराल पर तथा वर्षा और ग्रीष्म ऋतु में पन्द्रह-पन्द्रह दिनों के अंतराल पर मैथुन कर्म (सम्भोग) करना चाहिए |

ऊपर बताई विधि के उलट बेकाबू होकर अधिक जल्दी जल्दी भोग से भ्रम (सांसारिक मोह) होने लगता है, क्लम,  उरुदौर्बल्य मतलब कमर के नीचे और घुटनों के ऊपर का शरीर और उसके अंग जैसे लिंग, अंडकोष, प्रोस्टेट ग्रंथि आदि में कमजोरी आने लगती है, बल क्षय (शारीरिक और मानसिक बल का नास होने लगता है), धातु कमजोर होने लगती है, आँखे, दिल दिमाग और बाकी सब इन्द्रियां भी धीरे धीरे कमजोर होने लगती हैं तथा अकाल मृत्यु का भी दर रहता है क्योंकि वीर्य ही जीवन है |

स्मृतिमेधाऽऽयुरारोग्यपुष्टीन्द्रिय यशोबलैः |

अधिका मन्दजरसो भवन्ति स्त्रीषु संयताः ||७५||

स्नानानुलेपनहिमानिलखण्डखाद्यशीताम्बुदुग्धरसयूषसुराप्रसन्नाः |

सेवेत चानु शयनं विरतौ रतस्य तस्यैवमाशु वपुषः पुनरेति धाम ||७६||

भावार्थ : जो पुरुष संयम के साथ ऊपर बताये नियम का पालन करता है और उसी मर्यादा में भोग करता है उसे स्मृति, मेधा, आयु, आरोग्य, पुष्टि, इन्द्रिय बल, शुक्र, यश और बल की प्राप्ति होती है तथा बुढ़ापा देर से आता है | मैथुन कर्म के बाद स्नान करें, खुशबूदार कोई लेप जैसे इत्र लगाएं, शीतल वायु में बैठें, मीठे अन्न (खीर), ठंडा पानी, दूध, जूस, में से कोई चीज लेकर प्रसन्नता से सो जाएँ – ऐसे करने से शक्ति का संचार होगा |

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Ramgopal
Ramgopal
1 year ago

Namakaram Guruji. Please give this article in English some of us from South understand Hindi but cant read and write the language.

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Nityanandam Shree
Nityanandam Shree
1 year ago
Reply to  Ramgopal

Pray for it. I’l try my Best God Bless

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[…] दर्शन, स्पर्शन आदि में संयम तथा मैथुन से बचना ब्रह्मचर्य है । अशुभ का दर्शन, […]

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amitb
amitb
6 months ago

Swamiji,
Kripya din kae Samay kae baare main bhi batayein

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