रास्नादि चूर्ण-३ के सेवन से 80 प्रकार के वात रोगों जैसे जोड़ों का दर्द, गठिया, हड्डियों का टेढ़ापन जैसे रोगों का शमन होता है नित्यानंदम श्री

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वात रोग

रास्नादि चूर्ण-३ सामग्री

रास्ना, कूठ, तगर, सौंठ, काली मिर्च, पीपल, चव, चीता, पीपलामूल, कचूर, पाठा, बच, सारिवा, चिरायता, हर्र, बहेड़ा, आमला, खरैटी, दशमूल की प्रत्येक वस्तु, संभालु, एरंड की जड़, हींग, अमलबेत, अजमोद, वन तुलसी, जवाखार, सज्जीखार, सैंधा नमक, काला नमक और बिड नमक;

रास्नादि चूर्ण-३ बनाने व खाने की विधि

सब जड़ी बूटियाँ एक सामान मात्रा में लेकर ओखली में कूट कर चूर्ण कर लें और इसे एक कटोरी गर्म दूध या गर्म पानी में एक-दो चम्मच पोखरमूल के तेल डाल कर उस पानी या दूध से एक चम्मच रास्नादी चूर्णं-३ सुबह खाली पेट फांक लें और आधा घंटा कुछ न खाएं या फिर रात को हल्के भोजन के एकाध घंटे बाद उसी विधि से लें | इसे एक चम्मच की मात्रा में एक गिलास पानी में उबाल कर आधे से भी कम जल शेष रह जाने पर एक चम्मच पोखरमूल का तेल मिलाकर गुनगुना क्वाथ बनाकर भी लिया जा सकता है | कुछ सप्ताह के लगातार सेवन से ये लाभ करने लगता है और कुछ माह लगातार प्रयोग करें |

मालिश व बाह्य प्रयोग हेतु

इस रास्नादि चूर्ण-३ की दर्द और सूजन वाले स्तान पर मालिश भी करें तो और भी अच्छा | मालिश के लिए जरूरत अनुसार कुछ चूर्ण लेकर गर्म पानी में मिला कर पेस्ट (कल्क) बना लें और नहाने से कुछ देर पहले दर्द व सूजन वाले स्थान पर उस गुनगुने-गुनगुने पेस्ट से मालिश करें | आठ-दस मिनट की हल्की हल्की मालिश के बाद दस पंद्रह मिनट उसे लगा रहने दें | उसके बाद आप हलके गुनगुने पानी से नहा लें | सुबह कभी समय की कमी के चलते इसे दिन में किसी भी समय या रात को भी लगा सकते है | अन्य समय में फिर इसे गर्म पानी से धो कर साफ़ कर लें |  

लाभ

रास्नादि चूर्ण-३ के सेवन से 80 प्रकार के वात रोग जैसे जोड़ों का दर्द, गठिया, हड्डियों का टेढ़ापन जैसे रोगों का शमन होता है | चिकित्सकीय परामर्श से ही लें |

सावधानी 

इस औषधि के साथ आहार / खान-पान का भी ध्यान रखें | वात रोग बढाने वाले रूखे सूखे, ठन्डे, बासी, भारी भरकर, गैस बनाने वाले व खट्टे पदार्थों का भी परहेज रखें | फ्रिज की चीजें न ही लें तो अच्छा |

पोखरमूल का तेल

आधा किलो (500 ग्राम) पोखरमूल को कूट कर चूरा चूरा करके चार किलो पानी में धीमी आंच पर उबालें / पकावें | ढक्कन खुला रखें और आंच धीमी | जब एक चौथाई यानी एक किलो पानी रह जाए तब छान लें | अब इस पानी में अलग से पचास ग्राम पोखर मूल चूरा करके सूखा पाउडर उसी काढ़े में से कुछ पानी लेकर दोनों को पेस्ट बनाकर तथा साथ ही साथ उसी पानी में 250 ग्राम तिल का तेल मिला कर फिर से उबालें | जब पानी सूख जाए और 250 ग्राम तेल ही नीचे रह जाए तब तेल को छान लें | ये पोखरमूल का तेल है |

ऊपर दिए गए अनुपात को न बदलें लेकिन यदि चाहें तो तेल कम या ज्यादा मात्रा में बना सकते हैं |

उबालने के लिए मिटटी का बर्तन या तांबे और पीतल का कलई किया हुआ बर्तन सबसे अच्छा है | स्टील या एल्युमीनियम के बर्तन में औषधि उबालना सही नहीं माना जाता |

  • नित्यानन्दम श्री, आनन्दम आयुर्वेद
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