अष्टनिधि पेय : यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, फैटी लीवर के संतुलन करता है

6
13306
अष्टनिधि पेय

अष्टनिधि पेय / क्वाथ

सामग्री : अर्जुन की छाल, कुटकी, कमल के फूल, गोखरू, गिलोय डंडी, मुलेठी, सौंठ, सफ़ेद चन्दन;

बनाने व खाने की विधि : सब जड़ी-बूटियाँ एक सामान मात्रा में लेकर ओखली में कूट कर जौकुट चूर्ण कर लें | अब 1 से 1½ चम्मच यानि पांच-सात ग्राम क्वाथ को 1½ गिलास पानी में उबालें जब एक तिहाई यानि आधा गिलास रह जाए तब छान कर हल्का गुनगुना रह जाने पर पियें | इसे सुबह खाली पेट लेना सबसे अच्छा है |

इसे पीने के पच्चीस मिनट तक भोजन किया जा सकता है | यदि इसे पीने के बाद घबराहट हो तो जल्दी भोजन कर सकते हैं | सुबह कभी समय की कमी के चलते या किसी अन्य कारण से सुबह इसे न पी पायें तो शाम को सूर्यास्त के समय से लेकर रात्रि भोजन से पहले भी ले सकते हैं, परन्तु सुबह लेने से ये ज्यादा लाभ करेगा | ये हल्का कड़वा हो सकता है | इसमें हालाँकि हल्का मीठा मिलाया जा सकता है पर ऐसी औषधियां यदि बिना मीठा मिलाये ली जाए तो ही पूर्ण लाभकारी सिद्ध होती हैं | यदि रोग ज्यादा पुराना हो या फिर ज्यादा जटिल हो, या फिर आप कोई अन्य दवाई / औषधि नहीं ले रहे हैं तो फिर इसे सुबह-शाम दो बार भी लिया जा सकता है | कुछ सप्ताह के लगातार सेवन से ये लाभ करने लगता है | कम से कम चालीस दिन लगातार प्रयोग करें | लगभग तीन माह के प्रयोग के बाद एक माह बंद करके फिर से प्रयोग कर सकते हैं |

लाभ : अष्टनिधि पेय के सेवन / प्रयोग से रक्त की अम्लता / यूरिक एसिड शांत होती है | यूरिक एसिड से जोड़ो में दर्द होना या जोड़ों का सूज़ जाना शांत होता है | यकृत का शोधन कर लीवर की अधिक चर्बी / फैटी लीवर को समाप्त करता है | रक्त वाहिनी नाड़ियों में जमे मैल / चर्बी / ब्लोकेज को भी खोलता है | लिपिड प्रोफाइल को सुधारता है | पेशाब और पखाने के रास्ते गंदगी बाहर निकालता है | खून और पेशाब में पाया जाने वाला बेकार तत्त्व क्रिएटिनिन (Creatinine) भी इस पेय को पिलाने से एक माह में असर दिखाने लगता है और तीन माह में किडनी को पुनह उसकी काम करने की अग्नि वापिस कर देता है | नाड़ियों की चर्भी घटाता है इसलिए ये हृदय के लिए अच्छा है व जिनको सीडियां चढ़ते समय सांस चढ़ता है या पूरा पेशाब नहीं आता उनके लिए भी अच्छा है | चिकित्सकीय परामर्श से ही लें |

Ashtanidhi Peya Ayurvedis Tea for Uric Acid, High Cholestrol & Fatty Liver By Nityanandam Shree

सावधानी : न तो ये बहुत गर्म है न ही ठंडा; फिर भी ये तासीर में हल्का गरम जरुर है तभी तो ये नाड़ियाँ और खून साफ़ करता है | यदि किसी को ये जरा-बहुत गर्मी करे तो उसका समाधान ये है कि या तो फिर इसे गुनगुना न पियें ठंडा कर के पियें और या फिर इसे बिना उबाले ही रात को 1 से 1½ चम्मच क्वाथ आधे ग्लास पानी में भिगो दें और सुबह घोट कर या मसल कर निचोड़ कर पी लें तब ये सौम्य असर दिखाएगा; फिर भी पहले उबाल कर गुनगुना ही लें वो जल्दी लाभ करता है |

पथ्य-अपथ्य : इस औषधि के साथ आहार / खान-पान का भी ध्यान रखें | हल्का सुपाच्य भोजन लें | वात बढाने वाले रूखे सूखे, ठन्डे, बासी, भारी भरकर, गैस बनाने वाले व खट्टे पदार्थों का भी परहेज रखें | पित्त बढ़ाने वाले गरम मसाले, लाल व काली मिर्च का परहेज रखें | कफ़ बढ़ाने वाले तले व चर्बी / वसायुक्त पदाथों का परहेज रखें | यूरिक एसिड वाले रोगी इन चीजों जैसे निम्बू, इमली, पनीर, दही, दालों का परहेज भी शुरू के कुछ सप्ताह कठोरता से पालन करें | फ्रिज की चीजें न ही लें तो अच्छा |

विशेष : ऊपर दिए गए अनुपात (Ratio) को न बदलें | उबालने के लिए मिटटी का बर्तन या तांबे और पीतल का कलई किया हुआ बर्तन सबसे अच्छा है | स्टील या एल्युमीनियम के बर्तन में औषधि उबालना सही नहीं माना जाता | औषधि ढक्कन खोल कर उबालें इस से ये पचने में हल्का रहेगा |

-नित्यानन्दम श्री, आनन्दम आयुर्वेद

+15

6 COMMENTS

  1. Namaste ji, main abhi dashmoola kwath pita hu to kya ye ashtanidhi peya bhi usi din le sakte hai? Aap agar uttar de pau to badi maherbani hogi. Dhanyavad.

    0
  2. I am ckd patient stage 5 am having ashtnidhi paye.I wanted to know how many months do I have it to bring my creatinine 3.62 and urea105 to normal.

    +1

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here