मेरे सतगुरु प्यारे : Poem By Nityanandam Shree

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मेरे सतगुरु प्यारे, तुम हो मेरे प्राण अधारे |

तुम जो साथ ना होते हमारे, हम होते निगुरे और निठारे ||

मेरी पीड़ा तुम्हीं जानों, मेरा प्रेम तुम्हीं पछानों |

घट घट में है ब्रह्म तुम जानों, हम तेरे हैं ऐसा तुम मानो ||

ज्ञान का दीप जलाया तुमने, प्रेम का गीत सुनाया तुमने |

तपते को दी छाया तुमने, रोता बालक हसाया तुमने ||

मेरा तो विश्वास तुम्हीं हो, आती जाती हर श्वास तुम्हीं हो |

मेरे जीवन की आस तुम्हीं हो, हर दम मेरे पास तुम्हीं हो ||

मेरा बिगड़ा जीवन सवारा, मुझ जैसे पापी को तारा |

डूब रहा था मुझको उबारा, ठुकराया था मुझको स्वीकारा ||

मेरे प्रीतम यार तुम्हीं हो, जीवन के श्रंगार तुम्हीं हो |

मुझ बंधक के उद्धार  तुम्हीं हो, मेरी हर दरकार तुम्हीं हो ||

मेरा तुमने मान बढ़ाया, हर दम मुझको ऊंचा उठाया |

मैं सोया था तुमने जगाया, मैं बिछुड़ा था तुमने मिलाया ||

मेरी जीवन नईया तुम्हीं हो, मेरे कृष्ण कन्हैया तुम्हीं हो |

मुझ बालक की मईया तुम्हीं हो, बन्धू सखा और भईया तुम्हीं हो ||

जग में हर दम ठोकर खाई, ढूंढ थका न मिला सहाई |

तुमने अपनी बांह पकड़ाई, दीन हीन को दी शरणाई ||

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